शुक्रवार, 13 जनवरी 2012

उहापोह की स्थिति


उत्तर प्रदेश में चुनावी बिगुल बजते ही पार्टियों में घमासान शुरू हो गया है।कोई भी पार्टी किसी भी मोर्चे पर कोई भी कमजोरी नहीं रखना चाहती है।गौरतलब है कि चुनाव पूर्व चुनाव आयोग द्वारा चलाया गया डंडा कई पार्टियों के गले नहीं उतर रहा है। बसपा एक और चुनाव चिन्ह गजराज कि विशालकाय मूर्तियों को ढकने के चुनाव आयोग के  फरमान  को गलत बताने में जुटी है।वही कांग्रेस पार्टी के द्वारा मुसलमानों को चुनाव पूर्व थमाए गए आरक्षण रूपी लोलीपोप के ऊपर चुनाव आयोग कि रोक ने सत्तारूढ़ दल के होश उड़ा कर रख दिए हैं । बात-बेबात कांग्रेसी नेताओ का बयान खुद पार्टी के गले कि हड्डी बन जाता है।अपने बयान से आए दिन पार्टी को मुसीबत में डालने वाले दिग्विजय सिंह ने चुनाव प्रचार के दौरान आजमगढ़ में ये कह डाला कि बटला हाउस मुठभेड़ फर्जी था और वो चाहते हैं कि उसकी दुबारा जांच करवाई जाये।उनके इस बयान का खंडन करने खुद गृह मंत्री चिदंबरम को आना पड़ा।इस बयान ने ये सोचने को भी मजबूर कर दिया कि नेता वोट पाने कि खातिर किस हद तक जा सकते हैं!सोचने योग्य बात ये भी है कि इस तरह के गैर जिम्मेदाराना बयान पार्टी के आतंरिक कलह को भी उजागर करती है,जहा शायद आलाकमान का कोई भी जोर नजर नहीं आता।उठा- पटक कि इस राजनीति में किस दल को जनता का कितना समर्थन मिलेगा और कौन सी पार्टी उत्तर प्रदेश के नयी तक़दीर का फैसला करेगी ये तो वक़्त ही बताएगा।वैसे चुनाव आयोग का ये चुनावी डंडा पड़ा तो जोर का ही है।   

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