जयपुर साहित्य उत्सव काफी जोशो-खरोश के साथ आखिरकार शुरू हो ही गया ।कई नामचीन लोगो ने इस कार्यक्रम में शिरकत की भी की है।लेकिन इस साहित्य उत्सव में सलमान रुश्दी के आगमन को रोकने के लिए राजस्थान की राज्य सरकार और केंद्र सरकार ने जिन हथकंडो को अपनाया,वो वाकई शर्मनाक है।मुस्लिम संस्था दारुलउलाम देवबंद को रुश्दी के भारत आने पर कड़ी आपत्ति थी,और उनके सामने भारत सरकार ने घुटने टेक दिए।केंद्र सरकार के आदेश ने और राज्य सरकार की मिलीभगत ने रुश्दी को अपनी मातृभूमि आने से रोक दिया।इस राजनीति से भली भांति ये जाहिर है की अल्पसंख्यको के वोट बैंक को बनाये रखने की खातिर सरकार किस हद तक जा सकती हैं।आज पूरे विश्व और भारत वर्ष में लेखको का बड़ा कुनबा सलमान को भारत नहीं आने देने के इस फैसले का विरोध कर रहा है पर लालच की पराकाष्ठा पर खड़ी केंद्र सरकार को मानो कुछ सुनाई नहीं दे रहा है।राज्य पुलिस द्वारा रुश्दी को उनकी हत्या के आशंका की मनगढ़ंत कहानी सुनाना भी सरकार कि एक सोची समझी राजनीति का ही नतीजा है।
इस देश में हर किसी को अधिकार है कि वो धरना प्रदर्शन करे,विरोध प्रकट करे परन्तु सरकार ने व्यवस्था को उसके हाल पर छोड़ कर कट्टरपंथ के आगे घुटने टेक दिए।शायद केंद्र सरकार को उनका ये फैसला सही लगे पर इस निर्णय ने निश्चित रूप भारत कि सहिष्णुता और धर्मनिरपेक्षता को ताक पर रख दिया है।

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