उत्तराखंड में त्रिशंकु विधानसभा के परिणाम आते ही सभी राजनितिक दल अब जोड़-तोड़ कर के बहुमत हासिल करने की कवायद में जुट गए हैं।हालाकि किसी भी चुनाव के बाद ऐसी जोड़-तोड़ बहुधा देखने को मिलती है,पर शायद ही अब तक कोई भी राजनितिक दल इसे जनता की भावनाओ से खिलवाड़ मानता है।चुनाव प्रचार के दौरान हरेक दल अपने विरोधी दल की जम कर मिट्टी पलीद करता है,और जनता को यह विश्वास दिलाता है की,वह विरोधियो से कैसे बेहतर है।लेकिन चुनाव परिणाम अगर किसी भी दल को बहुमत से दूर रखते हैं,उस स्थिति में वो यह भूल जाता है की जनता ने विरोधी दल को नकारना चाहा था जिसकी वजह से उसके दल को अपना मत दिया था।सत्ता पाने की कवायद में वो सभी दल एक हो जाते हैं जिन्होंने चुनाव प्रचार के दौरान एक-दूसरे की इज्जत नीलाम करने में कोई भी कसर नहीं छोड़ी थी।और जनता के पास चुनाव के पास मूक दर्शक बन के तमाशा देखने के अलावा और कोई भी चारा नहीं रह जाता है।इसलिए जरुरत है कि चुनाव आयोग गठबंधन के सख्त नियम ले कर आये,और उसे लागू करे।जिससे चुनावो के बाद सत्ता हथियाने की होड़ में हमेशा जनता को ठेंगा दिखा के ५ साल के लिए एक ऐसा विषय न समझा जाए जिसके इम्तेहान में पास हो चुके हैं ।।।

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